Search This Blog

26 June, 2010

भायला(राजस्थानी)

जद उणां सूंप्यो उणनै
मीठै पुरसारै रो धामो
बिचै री सैंग पंगतां डाकनै
वो पूग्यो ठेठ वीं पंगत
जठै उडीकै हा पुरसारै सारू उणरा
खासमखास भायला
भायला आखिर भायला हुवै
भायला नै बिसरायां किंया सरै
आडै वगत भायला ईज काम आवै
वडा वडा जीमणां में
भायला मिल जावै तो राम मिल जावै
भायला साथै जीमणै
अर
भायला नै जीमावणै में
खास आनंद आवै

2 comments:

  1. बहुत अच्छी रचना

    ReplyDelete
  2. Very Nice , have not read a good Rajasthani Poem in a long time.

    ReplyDelete

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...