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05 November, 2011

जानना चाहता हूं

सच!
किसने कहा था तुम्हें
सबसे पहले
कड़वा!
और क्यूं?
उसने कैसे चखा था तुम्हें?
कैसे जाना स्वाद तुम्हारा
कि तुम कड़वे ही हो
झूठ क्यूं हुआ सफ़ेद
क्यों नहीं मिला उसे कोई स्वाद
किसने दिया
उसे रंग
तुम्हें स्वाद
बताओ सच!
आखिर है क्या....
तुम्हारे सच का
सच!
और झूठ का
झूठ!
मैं भी बोलना चाहता हूं बहुत कुछ
पर बोलने से पहले
जानना चाहता हूं.....

4 comments:

  1. मौलिक प्रश्न उठाती सुन्दर कविता।

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  2. बोलने से पहले जानना चाहता हूँ....
    बेहद सुन्दर बात!

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  3. बहुत अच्छी रचना...बधाई स्वीकारें

    नीरज

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  4. This comment has been removed by a blog administrator.

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