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24 September, 2011

अक्षर है प्रेम

अक्षर है
प्रेम
क्षरते हैं
प्रेम के आग्रह
प्रेम के आश्रय
आलंब-अवलंब
नहीं होती भाषा
कोई व्याकरण
पाठशाला
प्रेम की....
फ़िर भी
पूरे आवेग के साथ
पढा, पहचाना,
जाना जाता है
व्याप जाता है
प्रेम
जहां भी
होता है
प्रेम!

4 comments:

  1. प्रेम भी अक्षरणीय है।

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  2. सुंदर प्रेम भाव लिए अक्षर

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